क्या वर्ष 2025 का महाकुंभ वाकेई में 144 वर्षों बाद आया है? जानिए क्या है सच !

महाकुंभ का समापन तो 26 फरवरी 2025 को हो गया लेकिन 45 दिनों तक चले इस पावन मेले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिसमें से सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या इस बार आया महाकुंभ वाकेई में 144 सालो बाद आया है? इस सवाल का जवाब आज आपको हमारे ब्लॉग में मिल जाएगा । तो नमस्कार दोस्तों में करन चौहान आप सब के बीच फिर से हाजिर हुं एक ओर रोचक तथ्य लेकर आप सब ने अब तक महाकुंभ को लेकर तरह तरह की बाते सुनी होगी लेकिन आपको अपने सवालों का जवाब नहीं मिला होगा । लेकिन लेकिन लेकिन आज आपको न केवल 144 वर्षों बाद आए महाकुंभ का फैक्ट पता चलेगा बल्कि इसके साथ ही साथ हम आपको यह भी बताएंगे कि महाकुंभ के समापन तक कितने लोगों ने स्नान किया और कुंभ, अर्धकुंभ, पूर्णकुंभ ओर महाकुंभ के बीच का कन्फ्यूजन भी दूर करेंगे। तो चलिए बिना देरी करें शुरू करते हैं। 

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क्या वर्ष 2025 का महाकुंभ वाकेई में 144 वर्षों बाद आया है?

क्या वर्ष 2025 का महाकुंभ वाकेई में 144 वर्षों बाद आया है?

 जैसा कि हम सभी को बताया गया है कि इस बार प्रयागराज में जो मेला आयोजित किया गया है वह 144 वर्षों बाद आया है, लेकिन यहां थोड़ा विचार करने की आवश्यकता है कि अगर इस बार आयोजित मेला महाकुंभ था तो वर्ष 1989, 2001 और 2013 में हम सब को ऐसा क्यों कहा गया कि वो भी एक महाकुंभ था!

केवल इतना ही नहीं इससे पहले योगी सरकार ने साल 2018 में अर्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ कर दिया, जिससे इसके महत्व को और बढ़ाया जा सके।दरअसल हर कुंभ की खगोलीय गणना सूर्य और बृहस्पति की विशेष स्थितियों पर आधारित होती है, लेकिन 144 वर्षों की कोई मान्यता नहीं है। 

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महाकुंभ के समापन तक कितने लोगों ने किया संगम में स्नान।

साल 2025 में आयोजित महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर हुई थी और इसका समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर हुआ। इस बीच 45 दिनों तक चले महाकुंभ में 66 करोड़ 22 लाख से ज़्यादा लोगों ने स्नान किया। भारत में आयोजित इस मेले ने पूरी दुनिया में एक कभी ना टूटने वाला रिकॉर्ड बना दिया है।


महाकुंभ के समापन तक कितने लोगों ने किया संगम में स्नान।


कुंभ, अर्धकुंभ, पूर्णकुंभ ओर महाकुंभ के बीच का अंतर।

कुंभ मेला :-  कुंभ मेले का आयोजन हर तीन साल में हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज, और नासिक में किया जाता है। तथा इसका आयोजन सूर्य, चंद्रमा, और बृहस्पति की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है।

अर्धकुंभ मेला :-  अर्धकुंभ मेले का आयोजन हर छह साल में केवल प्रयागराज और हरिद्वार में किया जाता है। तथा कुंभ मेले के बीच में आने वाले अर्धकुंभ को कुंभ मेले का मध्य चरण माना जाता है।


कुंभ, अर्धकुंभ, पूर्णकुंभ ओर महाकुंभ के बीच का अंतर।


पूर्णकुंभ मेला :-  पूर्णकुंभ मेले का आयोजन हर 12 साल में प्रयागराज में किया जाता है। पूर्णकुंभ को कुंभ मेले का उच्चतम और धार्मिक स्तर माना जाता है। 

महाकुंभ मेला :-  महाकुंभ मेले का आयोजन हर 144 सालों में  केवल प्रयागराज में किया जाता है। महाकुंभ को सभी कुंभ मेलों में सबसे पवित्र माना जाता है। 


महाकुंभ 2025 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ।

प्रश्न 1। महाकुंभ का मेला कितने क्षेत्र में फैला हुआ है? 

उत्तर। महाकुंभ का मेला क्षेत्र 4 हज़ार हेक्टेयर में फैला हुआ है जो कि दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम से  160 गुना बड़ा है।


प्रश्न 2।  महाकुंभ 2025 में कितने अमृत स्नान हुए हैं?

उत्तर। इस बार महाकुंभ में कुल तीन अमृत स्नान हुए है। जो कि इस प्रकार है।

पहला अमृत स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन हुआ।

दूसरा अमृत स्नान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुआ। 

तीसरा अमृत स्नान 3 फ़रवरी को बसंत पंचमी के दिन हुआ।  

प्रश्न 3।  महाकुंभ में स्नान करने से क्या होता है?

उत्तर। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार महाकुंभ में स्नान करना बहुत पवित्र माना जाता है। महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है और जीवन के सभी पापों का नाश होता हैं।

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